एक अप्रैल 2020 के बाद देश में भारत स्टेज (बीएस)-4 वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह आदेश दिया। कोर्ट ने 27 अगस्त को इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। बीएस-4 प्रदूषक उत्सर्जन का मानक है। केंद्र सरकार ने 2016 में यह घोषणा की थी कि बीएस-5 मानकों से आगे बढ़कर 2020 तक बीएस-6 मानक लागू किए जाएंगे। बीएस-6 ईंधन में बीएस-4 के मुकाबले सल्फर काफी कम होता है। इससे प्रदूषण घटता है। उच्च बीएस मानकों वाले वाहन कम प्रदूषण फैलाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां बीएस-6 ईंधन सप्लाई के लिए रिफाइनरियों में 28,000 करोड़ रुपए लगाएंगी।
जून 2020 तक का समय चाहती थी सरकार
सरकार चाहती थी कि ऑटो कंपनियों को पुराना स्टॉक बेचने के लिए 30 जून 2020 तक का समय मिले। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट की एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह इसके खिलाफ थीं। उन्होंने बिना बीएस-6 मानक वाले भारी वाहनों की बिक्री के लिए 30 सितंबर 2020 तक का समय देने के प्रस्ताव का भी विरोध किया।
उच्चतम न्यायालय ने कहा- राजस्थान सरकार अरावली में खनन गतिविधियों से करीब 5 हजार करोड़ रुपए राजस्व हासिल कर रही है। लेकिन, इसके चलते दिल्ली के लाखों लोगों का जीवन संकट में नहीं डाला जा सकता है, क्योंकि अरावली के इलाके में पहाड़ियों का गायब होना एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने की एक अहम वजह हो सकता है।
जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा- पहाड़ियां भगवान की बनाई हुई हैं। अगर भगवान ने ऐसा किया है, तो इसके पीछे निश्चित तौर पर कोई वजह रही होगी। ये पहाड़ियां एक रुकावट की तरह काम करती हैं। अगर आप पहाड़ियों को हटाना शुरू कर देंगे तो आसपास के इलाकों से प्रदूषण दिल्ली में पहुंचेगा।
'कुछ खदानवालों के लिए आप दिल्ली में रह रहे लाखों लोगों का जीवन संकट में डाल रहे हैं। अगर आप राजस्व चाहते हैं तो ये आपको मिल सकता है, लेकिन इसके चलते दिल्ली में रहने वालों के स्वास्थ्य पर 10 गुना ज्यादा खर्च होगा। अगर देश से पहाड़ियां गायब हो जाएंगी तो क्या होगा।'
'सरकार अवैध खनन रोकने में नाकामयाब रही'
बेंच ने कहा- क्या लोग हनुमान बन गए हैं और पहाड़ियां उठाकर ले जा रहे हैं। राजस्थान में 15-20 फीसदी पहाड़ियां गायब हो गई हैं। ये आपकी जमीनी सच्चाई है।
अदालत ने कहा, 'राज्य सरकार अरावली की पहाड़ियों को अवैध खनन से बचाने में नाकामयाब रही है। ऐसा लगता है कि सरकार ने इस मसले को गंभीरता से नहीं लिया। हमारे निर्देश पर क्या कदम उठाए गए, इसकी जानकारी मुख्य सचिव एक हफ्ते के भीतर दें।'
'दिल्ली के अस्पतालों में लोग मर रहे हैं'
राजस्थान सरकार के वकील ने कहा कि हमारे विभाग अवैध खनन रोकने का काम कर रहे हैं। इस पर बेंच ने पूछा- किस तरह का काम? दिल्ली को नुकसान पहले ही हो गया है। आप 5 हजार करोड़ का राजस्व दिल्ली के लोगों के स्वास्थ्य के लिए दीजिए।
कोर्ट ने कहा- दिल्ली के अस्पतालों में जरूरत से ज्यादा मरीज हैं, यहां लोग मर रहे हैं। ये पूरी तरह निराशाजनक है। अगर सरकार अवैध कामों को चलते रहने देगी, तो कोई क्या कर सकता है। ये नियंत्रण से बाहर हो चुका है।
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