मध्य प्रदेश की राजनीति में बीता दिन काफ़ी उठा-पटक वाला रहा. अचानक से सियासी सरगर्मियां तेज़ हो गईं.
राज्य सरकार के मंत्री जीतू पटवारी ने बुधवार को ये आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के बीजेपी नेता आठ विधायकों को लेकर हरियाणा चले गए हैं और ये कमल नाथ सरकार को गिराने की साज़िश है.
इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शिवराज सिंह चौहान पर आरोप लगाते हुए पूछा, "भाजपा ने मध्य प्रदेश के कांग्रेस बसपा समाजवादी विधायकों को दिल्ली लाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है. बसपा की विधायक श्रीमती राम बाई को क्या भाजपा के पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह जी कल चार्टर फ़्लाइट में भोपाल से दिल्ली नहीं लाए? शिवराज जी कुछ कहना चाहेंगे?"
हालांकि बीजेपी ने दिग्विजय सिंह के आरोपों से साफ़ इनकार कर दिया. लेकिन क्या वाक़ई मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार संकट में है?
मध्य प्रदेश में चल रहे मौजूदा राजनीतिक घमासान को समझने के लिए बीबीसी संवाददाता प्रशांत चाहल ने राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार रशीद क़िदवई और भोपाल में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार राजेश चतुर्वेदी से बात की.
राशिद क़िदवई का मानना है कि मध्य प्रदेश में फ़िलहाल जो कुछ भी हो रहा है, उसका संबंध मार्च में होने वाले राज्यसभा चुनावों से अधिक है.
वो कहते हैं, "मध्य प्रदेश में तीन सीटें हैं और उसमें भी एक बीजेपी, एक कांग्रेस और तीसरी सीट जिसमें जादुई नंबर होता है उसमें कांग्रेस क़रीब है और इसी को लेकर ये सारी रस्साकशी चल रही है."
सीटों के समीकरण पर रशीद क़िदवई कहते हैं, "सीटों के समीकरण की बात करें तो कांग्रेस के कुल 122 हैं और बीजेपी के 107 हैं. राज्यसभा के सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया थोड़ी विस्तृत होती है. कांग्रेस और बीजेपी को एक-एक सीट आराम से मिल रही है लेकिन बात तीसरी सीट पर ही आकर रुक रही है. क्योंकि जहां फ़र्स्ट प्रीफ़रेंस वोट नहीं होंगे वहां सेकंड प्रीफ़रेंस वोट गिने जाएंगे और ऐसे में जो निर्दलीय हैं, सपा के सदस्य हैं और बसपा के पाँच सदस्य हैं, उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है."
हालांकि रशीद क़िदवई ये मानते हैं कि कांग्रेस को तोड़ने के लिए बीजेपी को एक बड़े समूह को तोड़ना होगा. 20-30 सदस्यों को तोड़ना होगा. क्योंकि अगर बीजेपी चार-छह सदस्यों को तोड़ भी लेती है तो उन्हें डिस्क्वालिफ़ाई कर दिया जाएगा और फिर से चुनाव कराए जाएंगे.
वो कहते हैं, "मध्य प्रदेश की नई असेंबली को बने अभी एक-डेढ़ साल ही हुआ है ऐसे में यह काफ़ी मुश्किल लगता है कि कोई सदस्य अपने तीन-साढ़े तीन साल के कार्यकाल को दांव पर लगाना चाहेगा. ऐसे में मौजूदा सरकार को गिराना या हिलाना बीजेपी के लिए आसान नहीं लगता है. इसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि मध्य प्रदेश में कोई अन्य नहीं है. कर्नाटक की तरह वहां कोई तीसरी पार्टी नहीं है, जिसे तोड़ा जा सके. ऐसे में सिर्फ़ कांग्रेस के सदस्यों को ही तोड़ने का विकल्प है और कांग्रेस के सभी सदस्य वो दिग्विजय सिंह, सिंधिया और कमलनाथ के ख़ेमो से जुड़ा हुआ है."
हालांकि रशीद क़िदवई बीजेपी के दावों को पूरी तरह से नकारते नहीं हैं. उनका कहना है कि बीजेपी का दावा है कि कांग्रेस में अंदरुनी लड़ाई चल रही है और ये बात कुछ हद तक सही भी है.
वो कहते हैं, "राज्यसभा की सीटों को लेकर निर्णय कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व यानी सोनिया गांधी और राहुल गांधी करते हैं. अगर राहुल गांधी करेंगे तो लोगों के मन में सवाल होता है कि वो उन लोगों के अनुभव और कार्यशैली को तवज्जो देंगे या फिर नकार देंगे. ऐसे में यह मामला कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति से भी है."
लेकिन इस सारी उठा-पटक से फ़ायदा किसे होता दिख रहा है?
इस सवाल के जवाब में रशीद क़िदवई कहते हैं, "राजनीतिक गणित की बात करें तो कांग्रेस को दो सीटों का फ़ायदा हो सकता है और बीजेपी को एक सीट का. लेकिन अमित शाह की रणनीति की बात करें तो वो राज्यसभा की सीटों को लेकर भी बेहद आक्रामक रणनीति बनाते देखे गए हैं. इन सीटों के बंटवारे को इस लिहाज़ से भी देखा जा सकता है. वहीं दूसरी ओर शिवराज सिंह चौहान पर भी ख़ुद को साबित करने का दबाव है. वो भी पूरी कोशिश करेंगे. अगर कांग्रेस को दो सीटें नहीं मिलती हैं तो स्पष्ट हो जाएगा कि कमलनाथ सरकार के पास बहुमत नहीं है और ऐसे में सरकार बिखरनी शुरू हो जाएगी."
वरिष्ठ पत्रकार राजेश चतुर्वेदी का भी यही मानना है कि ये सारी उठा-पटक राज्यसभा की तीन सीटों के लिए हो रहा है.
वो कहते हैं, "इन तीन सीटों में से दो सीटें अभी तक बीजेपी के पास थीं. और तीसरी सीट जो ख़ाली हो रही है वो कांग्रेस की दिग्विजय सिंह वाली है. ऐसे में विधानसभा में जो दोनों पार्टियों की क्षमता है उसके आधार पर दोनों पार्टियों को तो एक-एक सीट मिल ही जाएगी लेकिन सारी लड़ाई तीसरी सीट के लिए है. कांग्रेस को आशंका है कि बीजेपी क्रॉस वोटिंग करा सकती है और अगर क्रॉस वोटिंग होती है तो नुक़सान कांग्रेस का ही है. क्योंकि वो बहुत कम मार्जिन से जीतकर सरकार चला रहे हैं. ऐसे में अगर वो अपने सदस्यों पर कार्रवाई करेंगे तो उनकी सरकार के जाने का ख़तरा रहेगा."
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
肺炎疫情:美中台、世卫“口水战”延烧,特朗普引台湾邮件
美国、两岸和世界卫生组织之间围绕新冠肺炎疫情展开的 世界卫生组织与 色情性&肛交集合 美国的摩擦本 色情性&肛交集合 月越演越烈, 色情性&肛交集合 特别是在4月中旬,美国总统特朗 色情性&肛交集合 普宣布冻结美国给予世卫 色情性&肛交集合 的资金补助引起 色情性&肛交集合 轩...
-
मध्य प्रदेश की राजनीति में बीता दिन काफ़ी उठा-पटक वाला रहा. अचानक से सियासी सरगर्मियां तेज़ हो गईं. राज्य सरकार के मंत्री जीतू पटवारी ने ...
-
أدان وزراء خارجية دول أوروبية كبرى ما وصفوه بالتدخ ل التركي في ليبيا بعد إعلان أنقرة إرسال قوات لدعم الحكومة المعترف بها دوليا في طرابلس. ...
-
新冠肺炎疫情蔓延全球, 中国国家主 色情性&肛交集合 席习近平3月29日赴浙江宁 色情性&肛交集合 波调研考察。 色情性&肛交集合 这被视作他3月10日到 色情性&肛交集合 访疫情重灾区武汉之后, 色情性&肛交集合 力推“复工 色情性&肛交集合 复产”的首次考察。 色情性&...
No comments:
Post a Comment